राजनीतिक पार्टियों के चुनावी खर्च को काबू करने के मामले से जुड़ी की याचिका को लेकर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा कि पार्टियों के चुनावी खर्च पर लगाम लगाने में सफलता मिली है. चुनावों में धन बल की समस्या को खत्म करने के लिए उपाय कर रहे हैं. चुनाव से पहले रुपयों की जब्ती बढ़ना इसका सबूत है. खर्च पर्यवेक्षक, निगरानी दल अच्छा काम कर रहे हैं.
चुनाव आयोग ने ये हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर दाखिल किया है. इसमें राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा अत्यधिक चुनावी खर्च को रोकने के लिए एक व्यापक योजना के साथ निर्देश देने और दोषी उम्मीदवारों और पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. हलफनामे में ECI ने कहा है कि आज अधिक धन जब्त किए जाने का एक कारण आयोग द्वारा बढ़ी हुई सतर्कता और प्रयास है. चुनाव आयोग ने चुनावों में धन बल के खतरे को रोकने के लिए समय-समय पर विभिन्न उपायों को अपनाया है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेगा.
याचिकाकर्ता द्वारा मांगा गया तंत्र पहले से मौजूद है. ECI चुनाव में धन बल के बढ़ते उपयोग के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है. इस खतरे को रोकने के लिए, ECI ने 2010 में बिहार विधानसभा चुनावों के बाद से चुनावों में चुनाव खर्च निगरानी तंत्र को प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक लागू किया है. पार्टियों के खर्च को वैधानिक सीमा के भीतर रखने के लिए, ECI ने चुनाव के दौरान व्यय निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र की शुरुआत की है. इसमें व्यय पर्यवेक्षकों, वीडियो निगरानी टीमों, वीडियो बनाने वाली टीमों, लेखा टीमों, शिकायत निगरानी और कॉल सेंटर, मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति, उड़न दस्ते और स्थिर निगरानी टीमों की तैनाती शामिल है.
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